फरीसी खड़ा होकर अपने मन में यह प्रार्थना करने लगा, ‘हे परमेश्वर, मैं तेरा धन्यवाद करता हूँ, कि मैं और मनुष्यों के समान दुष्टता करनेवाला, अन्यायी और व्यभिचारी नहीं, और न इस चुंगी लेनेवाले के समान हूँ।
लूका 18:11
यीशु ने इस दृष्टांत को कुछ लोगों से कहा जो खुद पर भरोसा करते थे कि वे धर्मी थे और दूसरों को तुच्छ जानते थे।
आत्म-धार्मिकता हमारी आँखों को अपनी गलतियों से अंधा कर देती है और हमें दूसरों को नीचा दिखाने के लिए मजबूर करती है जो जीवन में असफल होते हैं, गलतियाँ करते हैं या हमारे जैसे आध्यात्मिक फल नहीं देते हैं।
एक बार एक प्रार्थना सभा में मेरा साथी सन्देश के दौरान सो गयी थी । मैं परेशान थी और उसका तिरस्कार किया। बस कुछ ही मिनटों में मैं भी सो गयी। लेकिन आत्मा में, मैं जाग रही थी । तब यहोवा ने मुझ से कहा, “दोष न लगाओ और तुम पर दोष नहीं लगाया जाएगा।” मैंने उसकी कमजोरी पर दया न करने का पश्चाताप किया।
लूका 13:2,3 यह सुनकर यीशु ने उनको उत्तर में यह कहा, “क्या तुम समझते हो, कि ये गलीली बाकी गलीलियों से पापी थे कि उन पर ऐसी विपत्ति पड़ी?”मैं तुम से कहता हूँ, कि नहीं; परन्तु यदि तुम मन न फिराओगे* तो तुम सब भी इसी रीति से नाश होंगे। लूका 6:41 – तू अपने भाई की आँख के तिनके को क्यों देखता है, और अपनी ही आँख का लट्ठा तुझे नहीं सूझता?
जब हम स्वधर्मी होते हैं (अपने कर्म से धर्मी होना ), तो हममें ईश्वर के प्रति कृतज्ञता दिखाने की कमी होती है।
लूका 7:36-47 में, एक फरीसी ने यीशु को अच्छे भोजन के लिए आमंत्रित किया। एक पापी स्त्री ने यीशु के बारे में सुना और उस स्थान पर आई। वह फरीसी जो व्यवस्था का पालन करने में चौकस था, उस स्त्री को तुच्छ जानता था, क्योंकि वह पापी थी। लेकिन दूसरी ओर, पापी स्त्री ने अपने आपको दोषी मानकर,पश्चाताप के रूप में रोती हुई यीशू के पावों को आसुओं से भिगोने और अपने सर के बालों से पोछंने लगी और उसके पाँव बार-बार चूमकर उन पर इत्र मला। यीशू ने 47 वि वचन में कहा – इसलिए मैं तुझ से कहता हूँ; कि इसके पाप जो बहुत थे, क्षमा हुए, क्योंकि इसने बहुत प्रेम किया; पर जिसका थोड़ा क्षमा हुआ है, वह थोड़ा प्रेम करता है।”
कर्मों में दिखाई गई मनुष्य की धार्मिकता दूसरे मनुष्यों के सामने घमण्ड करने का कारण होता है, परन्तु परमेश्वर के निकट नहीं –रोमी 4:2
यशायाह 64:6 – परमेश्वर के उपस्थिति में हमारी धार्मिकता के काम सब के सब मैले चिथड़ों के समान हैं।
रोमी 3:22 – अर्थात् परमेश्वर की वह धार्मिकता, जो यीशु मसीहपर विश्वास करने से सब विश्वास करनेवालों के लिये है।
गलातियों 2:20 – मैं शरीर में अब जो जीवित हूँ तो केवल उस विश्वास से जीवित हूँ, जो परमेश्वर के पुत्र पर है, जिस ने मुझसे प्रेम किया, और मेरे लिये अपने आप को दे दिया।
आमीन
Sol Sheeba Benjamin AOJ